Pages

▼

Saturday, December 20, 2014

जरा नीचे भी,,,,,,,,,

एक बार रात को लगभग १० बजे मुझे ख्याल आया कि मुख्य गेट खुला ही रह गया है। सोने से पहले मैं जब बाहर निकली तो मैंने देखा कि विनय की खिड़की थोड़ी सी खुली रह गई थी। मैंने यूं ही अन्दर झांका तो मेरे बदन में जैसे चींटियां रेंगने लगी।

विनय बिलकुल नंगा खड़ा था और

पुरे कहानी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिय 

No comments:

Post a Comment