बुड्ढे का जवानी
रोज सुबेरे चौराहे पर जाकर स्कूल जाती लड़कियों को चोदने के लिए ललचाती नजरों से देखते और फिर कोई हिंट न मिलने से उदास होकर धोती में लटकता लंड लेकर वापस चले आते। बुढौती का सहारा डंडा अब खड़ा नहीं होता है। तो क्या हुआ, मन तो चंचल है और बच्चा भी, इसका बुढापा नहीं आता और इस कदर से बुढापे में लौड़ा की छीछालेदर होने से बचाने के लिए कोई ना कोई उपाय तो करना ही पड़ेगा।
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